भारत में, तीसरे लिंग को कानूनी मान्यता 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से मिली. इस फैसले के बाद, तीसरे लिंग के लोगों को पहचान पत्र, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवा सहित सभी सरकारी सेवाओं तक पहुंच प्राप्त करने का अधिकार है. भारत के अलावा, कई अन्य देशों में भी तीसरे लिंग को कानूनी मान्यता दी गई है. इन देशों में शामिल हैं: ऑस्ट्रेलिया बेल्जियम ब्राजील कनाडा कोलंबिया डेनमार्क फिनलैंड फ्रांस जर्मनी आयरलैंड इटली नीदरलैंड न्यूजीलैंड नॉर्वे दक्षिण अफ्रीका स्पेन स्वीडन स्विट्जरलैंड यूनाइटेड किंगडम तीसरे लिंग को कानूनी मान्यता देने के लिए कई कारण हैं. इनमें शामिल हैं: तीसरे लिंग के लोगों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करना. तीसरे लिंग के लोगों को भेदभाव से बचाना. तीसरे लिंग के लोगों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं तक पहुंच को बढ़ाना. तीसरे लिंग के लोगों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना. तीसरे लिंग को कानूनी मान्यता देना एक महत्वपूर्ण कदम है जो तीसरे लिंग के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है.
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